बद्रीनाथ : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एक बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। शंकराचार्य ने राहुल गांधी को हिंदू धर्म से ‘बहिष्कृत’ करने की घोषणा करते हुए कहा है कि उन्हें हिंदू नहीं माना जाना चाहिए और उनके मंदिरों में प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए।
क्यों नाराज हैं शंकराचार्य?
विवाद की मुख्य जड़ राहुल गांधी द्वारा संसद में ‘मनुस्मृति’ को लेकर दिया गया एक बयान है। शंकराचार्य के अनुसार:
राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि मनुस्मृति “बलात्कारियों को संरक्षण देती है”।
शंकराचार्य का तर्क है कि मनुस्मृति हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है और इसका अपमान करना सीधे तौर पर सनातन धर्म का अपमान है।
उन्होंने बताया कि इस बयान पर स्पष्टीकरण के लिए राहुल गांधी को समय दिया गया था, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर यह कठोर निर्णय लिया गया।
“राम मंदिर और अन्य मंदिरों में न होने दें पूजा”
शंकराचार्य ने देश भर के तीर्थ स्थलों और पुजारियों से अपील की है कि:
प्रवेश पर रोक: राहुल गांधी को हिंदू मंदिरों (जिसमें अयोध्या का राम मंदिर भी शामिल है) में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
पूजा-पाठ वर्जित: हिंदू पुरोहितों और पंडितों को राहुल गांधी के लिए किसी भी प्रकार की शास्त्रीय पूजा या अनुष्ठान नहीं करना चाहिए।
पहचान पर सवाल: उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति हिंदू धर्मग्रंथों में विश्वास नहीं रखता, वह खुद को हिंदू कहने का हकदार नहीं है।
विरोध और समर्थन की लहर
जहाँ एक तरफ हिंदू संगठनों के कुछ वर्ग शंकराचार्य के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी ने केवल मनुस्मृति की कुछ व्याख्याओं की आलोचना की थी, न कि पूरे धर्म की। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि राहुल गांधी एक ‘शिव भक्त’ और जनेऊधारी हिंदू हैं, और राजनीति के तहत उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं।