DMK सांसद का विवादित बयान: ‘उत्तर भारत में महिलाओं का काम सिर्फ रसोई और बच्चे संभालना’

DMK सांसद का विवादित बयान

नई दिल्ली: अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली पार्टी DMK के एक सांसद ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। सांसद ने उत्तर भारत की संस्कृति और वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तर भारत में महिलाओं की भूमिका केवल रसोई घर और बच्चों की देखभाल तक सीमित है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

क्या कहा DMK सांसद ने?
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद (कथित तौर पर ए. राजा या दयानिधि मारन के पिछले बयानों की कड़ी में नया बयान) ने दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में महिलाओं की प्रगति और साक्षरता दर की तुलना उत्तर भारत से की। उन्होंने कहा:

“दक्षिण भारत में महिलाएं शिक्षित होकर ऊंचे पदों पर आसीन हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। इसके विपरीत, उत्तर भारत में आज भी महिलाओं की स्थिति वैसी ही है, जहां उनका मुख्य काम रसोई संभालना और बच्चों का पालन-पोषण करना माना जाता है।”

भाजपा और अन्य दलों का पलटवार
सांसद के इस बयान को ‘महिला विरोधी’ और ‘क्षेत्रीय भेदभाव’ को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।

भाजपा की प्रतिक्रिया: भाजपा नेताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि DMK उत्तर भारत के लोगों को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती। उन्होंने द्रौपदी मुर्मू (राष्ट्रपति), कल्पना चावला और उत्तर भारत की महिला खिलाड़ियों व वैज्ञानिकों का उदाहरण देते हुए इसे सांसद की ‘मानसिक दिवालियापन’ करार दिया।

नारी शक्ति का अपमान: कई महिला संगठनों ने भी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि महिलाओं के योगदान को केवल घरेलू कार्यों तक सीमित बताना उनकी क्षमता का अपमान है।

विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब DMK नेताओं ने उत्तर भारत या हिंदी भाषी राज्यों पर ऐसी टिप्पणी की हो। इससे पहले भी ‘सनातन धर्म’, ‘पानीपुरी बेचने वाले’ और ‘गौमूत्र राज्य’ जैसे बयानों से पार्टी विवादों में घिर चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश भी हो सकते हैं।