पटना: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आज बिहार की राजनीति का केंद्र राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आवास नहीं, बल्कि उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव का सरकारी आवास (26M स्ट्रैंड रोड) रहा। काफी समय से परिवार और पार्टी से अलग चल रहे तेज प्रताप के बुलावे पर खुद लालू प्रसाद यादव उनके घर पहुंचे, जिससे पारिवारिक और राजनीतिक दूरियां मिटने के संकेत मिल रहे हैं।
लालू बोले- ‘बेटे से कोई नाराजगी नहीं’
भोज में शामिल होने पहुंचे लालू प्रसाद यादव का स्वागत तेज प्रताप ने गर्मजोशी के साथ किया। इस दौरान लालू यादव ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा, “तेज प्रताप से मेरी कोई नाराजगी नहीं है। मकर संक्रांति का पर्व सबको जोड़ने का है और इस भोज में सभी को शामिल होना चाहिए।” पिता-पुत्र की इस मुलाकात को बिहार की राजनीति में एक बड़े भावनात्मक और राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब तेज प्रताप अपनी अलग पार्टी के बैनर तले सक्रिय हैं।
गवर्नर और एनडीए नेताओं की मौजूदगी ने चौंकाया
तेज प्रताप के इस दही-चूड़ा भोज की सबसे खास बात इसमें शामिल होने वाले मेहमान रहे:
राज्यपाल की उपस्थिति: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी इस भोज में शामिल हुए, जिन्होंने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
विपक्ष और सत्ता पक्ष का संगम: तेज प्रताप ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, भाजपा और जदयू के कई मंत्रियों को भी न्योता दिया था।
साधु यादव की वापसी: वर्षों की कड़वाहट के बाद तेज प्रताप के मामा साधु यादव भी इस भोज का हिस्सा बने, जो परिवार में सुलह का बड़ा संकेत है।
क्या है इस भोज के सियासी मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू यादव के घर पर इस बार पारंपरिक भोज का न होना और तेज प्रताप द्वारा इसका भव्य आयोजन करना, लालू की विरासत को संभालने की एक नई कोशिश है।
शक्ति प्रदर्शन: अपनी अलग पार्टी (JJD) बनाने के बाद तेज प्रताप ने दिखा दिया है कि उनके व्यक्तिगत संबंध सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों में मजबूत हैं।
परिवार में एकता: तेजस्वी यादव के साथ चल रही कथित तनातनी के बीच लालू-राबड़ी का उनके घर आना यह संदेश देता है कि संकट की घड़ी में परिवार अभी भी एक है।