राहुल गांधी का अयोध्या दौरा: 9 साल बाद रामलला के दरबार में हाजिरी की तैयारी, संतों ने दी मिली-जुली प्रतिक्रिया

राहुल गांधी का अयोध्या दौरा

अयोध्या: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अयोध्या दौरे की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। ताजा खबरों के अनुसार, राहुल गांधी जल्द ही अयोध्या जाकर भगवान रामलला के दर्शन कर सकते हैं। यदि यह दौरा होता है, तो वर्ष 2016 के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा।

23 जनवरी को दर्शन की संभावना?

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय से जुड़ी 32 सदस्यीय संसदीय समिति 23 जनवरी 2026 को अयोध्या के दौरे पर जा रही है।

समिति के सदस्य: इस समिति की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह कर रहे हैं और राहुल गांधी भी इस समिति के महत्वपूर्ण सदस्य हैं।

कार्यक्रम: समिति के सदस्य अयोध्या में कैंट क्षेत्र का निरीक्षण करने के साथ-साथ राम मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे।

कांग्रेस का रुख: “मंदिर अब पूर्ण है”

राहुल गांधी के अयोध्या न जाने पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इस पर कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी ने पहले कहा था कि वे अधूरे मंदिर में दर्शन के लिए नहीं जाएंगे।

“अब मंदिर का शिखर, ध्वज और निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, इसलिए राहुल गांधी अब रामलला के दर्शन करेंगे। वे सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करते हैं।”

अयोध्या के संतों की प्रतिक्रिया: तीखे सवाल और स्वागत
राहुल गांधी के इस संभावित दौरे पर अयोध्या के संत समाज की प्रतिक्रिया बंटी हुई नजर आ रही है:

आलोचनात्मक स्वर (महंत राजू दास व अन्य): हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास और कुछ अन्य संतों ने कांग्रेस के पुराने रुख (राम को काल्पनिक बताने वाले हलफनामे) की याद दिलाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “राजनीतिक लाभ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलना ठीक नहीं है। जो लोग प्राण-प्रतिष्ठा के निमंत्रण को ठुकरा चुके हैं, उनके आने का क्या औचित्य?”

सकारात्मक रुख (महंत संजय दास): हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास ने कहा कि “भगवान राम सबके हैं। अयोध्या में सबका स्वागत है। यदि राहुल गांधी यहाँ आते हैं और आशीर्वाद लेते हैं, तो यह अच्छी बात है।”

प्रायश्चित की सलाह: रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने पहले भी कहा था कि राहुल गांधी को अयोध्या आकर दर्शन करने चाहिए, जिससे उनके “पूर्वजों के पाप” धुल सकें। संतों का एक धड़ा इसे उनके ‘प्रायश्चित’ के रूप में देख रहा है।

2016 के बाद पहली बार
राहुल गांधी आखिरी बार सितंबर 2016 में अपनी ‘किसान यात्रा’ के दौरान अयोध्या आए थे। तब उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा की थी, लेकिन वे राम जन्मभूमि नहीं गए थे। इस बार उनका रामलला के दरबार में जाना 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।