प्रयागराज: तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या इस बार बेहद खास होने जा रहा है। संगम के रेतीले तट पर स्थित एरावत घाट को इस बार मुख्य स्नान केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के करीब 13 राज्यों से श्रद्धालु अमृत की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं।
एरावत घाट पर विशेष इंतजाम
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, एरावत घाट की लंबाई बढ़ाई गई है ताकि एक साथ हजारों श्रद्धालु सुरक्षित स्नान कर सकें। घाटों पर रोशनी के लिए दूधिया लाइटें और महिलाओं के लिए पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें घाटों पर निरंतर गश्त कर रही हैं।
यातायात और रूट डायवर्जन (Traffic Plan)
महास्नान के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस महानिरीक्षक ने रूट डायवर्जन प्लान लागू कर दिया है:
भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित: लखनऊ, वाराणसी, और कानपुर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को शहर की सीमा के बाहर ही रोक दिया जाएगा।
नो-व्हीकल जोन: संगम क्षेत्र की ओर जाने वाले सभी मार्गों को ‘नो-व्हीकल जोन’ घोषित किया गया है। श्रद्धालुओं को पार्किंग स्थलों से घाटों तक पैदल जाना होगा।
शटल बस सेवा: बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए प्रशासन ने विशेष शटल बसों का इंतजाम किया है जो पार्किंग से मेला क्षेत्र के प्रवेश द्वार तक चलेंगी।
13 राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन
रेलवे और रोडवेज ने मौनी अमावस्या के लिए सैकड़ों स्पेशल ट्रेनें और बसें चलाई हैं। एरावत घाट के पास बने शिविरों में 13 अलग-अलग राज्यों के सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों ने डेरा डाल दिया है। मौन रहकर दान-पुण्य करने की इस परंपरा के लिए कल्पवासी भी उत्साहित हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पूरे मेला क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की निगरानी में रखा गया है। एरावत घाट पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्थाई अस्पताल और एंबुलेंस तैनात की गई हैं। पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें।