आगरा : समाजवादी पार्टी (सपा) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जोर-शोर से जुटी हुई है। पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूला, जो 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए गेमचेंजर साबित हुआ था, अब आगरा में भी मजबूती से लागू किया जा रहा है। आगरा जिले की 9 विधानसभा सीटों पर सपा का ऐतिहासिक प्रदर्शन कमजोर रहा है (बाह को छोड़कर बाकी सीटों पर पार्टी का खाता नहीं खुला), लेकिन अब पार्टी संगठन को नया रूप दे रही है ताकि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोटरों को मजबूती से जोड़ा जा सके।
संगठन में बड़े बदलाव और पीडीए पर फोकस
सपा ने हाल ही में आगरा जिले के सभी विधानसभा प्रभारियों को हटा दिया है। नए प्रभारियों की नियुक्ति में पीडीए फार्मूले को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला और महानगर कार्यकारिणी का भी पुनर्गठन होने वाला है, जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के कार्यकर्ताओं को ज्यादा जगह मिलेगी। यह बदलाव 2026 के जिला पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने ये कदम उठाए हैं।
आगरा में पीडीए को मजबूत करने की रणनीति
रामजीलाल सुमन (राज्यसभा सांसद और दलित चेहरा) को पार्टी आगे बढ़ा रही है। उनके घर पर हुए हमले को “दलित नेता पर हमला” बताकर प्रचार किया जा रहा है, जिससे दलित वोटरों में एकजुटता बढ़ रही है।
अखिलेश यादव ने आगरा में सुमन से मुलाकात की और 2027 में अगड़ा बनाम पिछड़ा की लड़ाई का संकेत दिया। पार्टी आगरा को सामाजिक न्याय का प्रतीक बनाने की बात कर रही है।
सपा ने पीडीए पंचायत, पीडीए चर्चा और पीडीए पंचांग (जिसमें दलित-पिछड़े महापुरुषों की जयंतियां शामिल हैं) जैसे अभियान चलाए हैं, जो आगरा सहित कई जिलों में जारी हैं।
चुनौतियां और लक्ष्य
आगरा में जाटव दलितों की अच्छी संख्या है, लेकिन पहले ये बसपा के साथ जुड़े रहते थे। सपा अब गैर-यादव पिछड़ों, दलितों और मुस्लिम वोटरों को PDA के जरिए एकजुट कर रही है। पार्टी का दावा है कि 2027 में PDA फार्मूला BJP को सत्ता से बाहर करेगा।
सपा का मिशन 2027 आगरा में सामाजिक न्याय और समावेशी प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है। संगठन मजबूत करने से लेकर टिकट वितरण तक पीडीए को आधार बनाया जा रहा है, ताकि दलित-पिछड़े वर्गों का भरोसा जीता जा सके। चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, ये रणनीति और धारदार होती दिखेगी!