सोमनाथ : प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ की पावन धरा आज शौर्य और स्वाभिमान की साक्षी बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह सोमनाथ के ‘शंख सर्किल’ से भव्य शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं के सम्मान में निकाली गई, जिन्होंने सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों से इस पवित्र मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
108 घोड़े और सांस्कृतिक वैभव
शौर्य यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण गुजरात पुलिस के अश्वारोही दल (Cavalry) के 108 घोड़े रहे। पारंपरिक परिधानों में सजे घुड़सवारों और हजारों की संख्या में मौजूद भक्तों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय और गौरवशाली बना दिया।
प्रतीक: ये 108 घोड़े भारत की अदम्य शक्ति और बलिदान का प्रतीक बनकर सड़क पर उतरे।
भक्तों का हुजूम: सड़क के दोनों ओर हजारों लोग हाथों में तिरंगा और भगवा ध्वज लिए प्रधानमंत्री का स्वागत करने और इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने पहुंचे।
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का महत्व
यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा ऐतिहासिक संदर्भ है:
1000 वर्ष का इतिहास: यह पर्व 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा मंदिर पर किए गए पहले बड़े आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किया जा रहा है।
75वीं वर्षगांठ: आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर के पुनर्निर्माण (1951) के भी 75 वर्ष इस साल पूरे हो रहे हैं।
ड्रोन शो और ओंकार जाप: इससे पहले शनिवार रात को 3,000 ड्रोन्स के माध्यम से आकाश में मंदिर का इतिहास उकेरा गया और पीएम मोदी ने 72 घंटे तक चलने वाले ‘अखंड ओंकार जाप’ में भी हिस्सा लिया।
PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर इस अनुभव को साझा करते हुए इसे “सभ्यतागत वीरता का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की उस अटूट आस्था का प्रमाण है, जिसे कोई भी आक्रांता कभी मिटा नहीं सका। शौर्य यात्रा के बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।