राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: अब ‘राम दरबार’ नहीं, इस नए नाम से जानी जाएगी प्रभु की सभा

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला

अयोध्या: भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब एक और ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने संतों और धर्माचार्यों के परामर्श के बाद मंदिर के ‘राम दरबार’ का नाम बदलने का निर्णय लिया है। अब इसे आधिकारिक रूप से ‘राम पंचायतन’ के नाम से जाना जाएगा।

क्यों बदला गया नाम?
सनातन धर्म की परंपराओं और शास्त्रों के अनुसार, ‘दरबार’ शब्द अक्सर राजशाही या प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाता है। संतों का तर्क था कि प्रभु श्री राम का स्वरूप केवल एक राजा का नहीं, बल्कि पंचतत्वों और समस्त देवताओं के अधिपति का है।

धार्मिक महत्व: ‘पंचायतन’ शैली भारतीय मंदिर वास्तुकला की एक प्राचीन और पवित्र पद्धति है।

संतों का सुझाव: काशी और अयोध्या के प्रमुख विद्वानों ने सुझाव दिया था कि प्रभु के इस पवित्र स्थान के लिए ‘पंचायतन’ शब्द अधिक उपयुक्त और शास्त्र सम्मत है।

क्या है ‘राम पंचायतन’ की विशेषता?
राम मंदिर के प्रथम तल पर बनने वाले इस राम पंचायतन में केवल प्रभु राम और माता सीता ही नहीं होंगे, बल्कि यह एक पूर्ण आध्यात्मिक सभा होगी:

मुख्य विग्रह: केंद्र में भगवान श्री राम और माता जानकी विराजमान होंगे।

भ्राता और भक्त: चारों भाई (लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न) और परम भक्त हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।

पंचदेव परंपरा: इसमें सूर्य, गणेश, शिव, शक्ति और विष्णु के स्वरूपों का भी समावेश होगा, जो हिंदू धर्म की पंचायतन पूजा पद्धति को पूर्ण करता है।

ट्रस्ट की तैयारी
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, मंदिर के प्रथम तल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। ‘राम पंचायतन’ के लिए मूर्तियों का निर्माण भी विशेष पत्थरों से कराया जा रहा है, ताकि आने वाले हजारों वर्षों तक इनकी भव्यता बनी रहे।

भक्तों के लिए संदेश: अब जब भी श्रद्धालु प्रथम तल के दर्शन करेंगे, वे ‘राम दरबार’ की जगह ‘राम पंचायतन’ के दिव्य स्वरूप का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।