लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) के बाद एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, योगी मंत्रिमंडल (Yogi Cabinet) के विस्तार और भाजपा संगठन के पुनर्गठन की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में पीएम मोदी और अमित शाह के साथ हुई मुलाकातों को इसी ‘मिशन 2027’ की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
- मंत्रिमंडल में 6 नई कुर्सियां, पुराने मंत्रियों की छुट्टी संभव
- वर्तमान में योगी कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम सीमा 60 है। यानी 6 नए मंत्रियों के लिए जगह खाली है।
- भूपेंद्र चौधरी की वापसी: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट में शामिल किया जाना लगभग तय माना जा रहा है। वे पहले भी योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं।
- जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए भाजपा इस बार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के काट के तौर पर कुर्मी, पाल, पासवान और कुशवाहा समाज के चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है।
- विभागों में फेरबदल: खबर है कि केवल नए मंत्री ही नहीं जुड़ेंगे, बल्कि खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं।
संगठन में 30-40% नए चेहरे
नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की कमान संभालने के बाद संगठन में भी भारी फेरबदल की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कार्यकारिणी के 18 उपाध्यक्षों, 7 महामंत्रियों और 16 सचिवों की सूची में 30 से 40 प्रतिशत बदलाव हो सकता है।
मिशन 2027 और ‘युवा जोश’ पर फोकस
भाजपा का पूरा ध्यान अब 2027 के विधानसभा चुनाव पर है। यही वजह है कि संगठन और सरकार दोनों में युवाओं और ऊर्जावान चेहरों को जगह देने की रणनीति बनाई गई है। पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को इस विस्तार में विशेष तवज्जो मिलने की उम्मीद है, जहाँ पार्टी अपना आधार और मजबूत करना चाहती है।
इन नामों की है चर्चा (संभावित):
भूपेंद्र चौधरी (जाट चेहरा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
मनोज पांडे (ब्राह्मण चेहरा, रायबरेली से विधायक)
पूजा पाल/अशोक कटारिया (ओबीसी समीकरण)
पंकज सिंह (युवा चेहरा, नोएडा विधायक)
साध्वी निरंजन ज्योति (निषाद समाज का प्रतिनिधित्व)