नई दिल्ली : हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को बेहद शुभ पर्व माना जाता है। इस साल 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि 23 वर्ष बाद इस पर्व पर षटतिला एकादशी का संयोग बन रहा है। यह संयोग सूर्य देव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर देता है।
यह संयोग क्यों है खास?
- मकर संक्रांति उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जब सूर्य देव उत्तर की ओर गमन करते हैं।
- षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें तिल का विशेष महत्व होता है (षट् अर्थात छह तरीकों से तिल का प्रयोग)।
- इस संयोग में स्नान, दान, पूजा और व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
- साथ ही सरवार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जो हर कार्य को सफल बनाने वाले हैं।
- खिचड़ी का दान: शुभ है या नहीं?
- मकर संक्रांति को ‘खिचड़ी पर्व’ भी कहा जाता है। इस दिन उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी बनाकर दान करना और भोग लगाना सदियों पुरानी परंपरा है। लेकिन एकादशी होने से असमंजस है, क्योंकि:
एकादशी पर चावल (अन्न) का सेवन, स्पर्श और दान वर्जित माना जाता है। शास्त्रों में इसे महर्षि मेधा के शरीर का अपमान बताया गया है।
चावल खाना या दान करना पाप के समान हो सकता है।
शास्त्रों और ज्योतिषियों का मत क्या कहता है?
- एकादशी तिथि शाम करीब 5:52 बजे समाप्त हो जाएगी। उसके बाद द्वादशी शुरू होगी।
- इसलिए शाम के बाद खिचड़ी बनाकर दान करना और ग्रहण करना पूरी तरह शुभ रहेगा।
- दिन में एकादशी व्रत रखें: फलाहार करें, तिल का प्रयोग करें (तिल के लड्डू, तिल मिश्रित भोग)।
- वैकल्पिक दान: तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र, फल, घी या अन्य अन्न (बिना चावल के) का दान करें। ये सभी बेहद पुण्यदायी हैं।
- कुछ विद्वानों का कहना है कि संक्रांति का महत्व प्रमुख है, इसलिए शाम बाद खिचड़ी दान से कोई दोष नहीं लगेगा।
स्नान-दान-पुजा का शुभ मुहूर्त
- महापुण्य काल: सूर्य के मकर प्रवेश के आसपास (दोपहर 2:43 से शाम 5:30 तक लगभग)।
- पूर्ण पुण्य काल: सुबह से सूर्यास्त तक (करीब 16 घंटे)।
- गंगा स्नान या घर पर ही सूर्य को अर्घ्य दें।