सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए नितिन गडकरी की नई पहल: वाहनों के बीच ‘वायरलेस संवाद’ तकनीक

नई दिल्ली : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 8 जनवरी 2026 को एक बड़ी घोषणा की है। सरकार व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लाने पर काम कर रही है, जिससे वाहन आपस में वायरलेस तरीके से ‘बात’ कर सकेंगे। इससे सड़क दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

यह तकनीक कैसे काम करेगी?

  • वाहनों में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगाई जाएगी।
  • यह यूनिट वायरलेस सिग्नल के जरिए आसपास के वाहनों से रियल-टाइम जानकारी शेयर करेगी, जैसे:
  • स्पीड (गति)
  • लोकेशन (स्थान)
  • एक्सेलरेशन (तेजी)
  • ब्रेकिंग (अचानक ब्रेक लगना)
  • ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहन

अगर कोई वाहन अचानक ब्रेक मारता है या पार्किंग में खड़ा है, तो पीछे आने वाले वाहन को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
खासकर कोहरे (फॉग) में बड़े पैमाने पर पाइल-अप दुर्घटनाएं रोकने में मदद मिलेगी।
यह तकनीक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के साथ भी काम करेगी।

क्यों जरूरी है यह तकनीक?
भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। इनमें से 66% मौतें 18-34 साल के युवाओं की होती हैं। गडकरी ने कहा कि यह तकनीक दुर्घटनाओं को 80% तक कम कर सकती है।

कब लागू होगी?

  • दूरसंचार विभाग (DoT) ने 30 MHz स्पेक्ट्रम (5.875-5.905 GHz) को V2V के लिए मंजूरी दे दी है।
  • नए वाहनों में इसे अनिवार्य करने के लिए इस साल गाइडलाइंस जारी होंगी।
  • पूरे देश में रोलआउट 2026 के अंत तक होने की योजना है।
  • शुरुआत में नई कारों से होगी, फिर पुराने वाहनों में फेजवाइज लागू किया जाएगा।
  • लागत: ऑटो कंपनियों के लिए ₹5,000-7,000 प्रति वाहन।

यह तकनीक दुनिया के कुछ ही देशों में उपलब्ध है, और भारत इसे बड़े स्तर पर अपनाने वाला शुरुआती देशों में शामिल होगा। सरकार सड़क सुरक्षा के लिए कई अन्य कदम भी उठा रही है, जैसे कैशलेस इलाज स्कीम और बसों की सुरक्षा मानक सख्त करना।