वाराणसी: काशी विश्वनाथ धाम जाने वाले मार्ग को सुगम बनाने के लिए वाराणसी का बहुचर्चित दालमंडी सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट अब रफ्तार पकड़ चुका है। बुधवार को जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और पुलिस बल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए उन भवनों को गिराने का काम शुरू किया, जिनकी रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
20 मकानों पर शुरू हुई कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अब तक कुल 20 भवनों की रजिस्ट्री का काम संपन्न हो चुका है और संबंधित स्वामियों को मुआवजा भी वितरित कर दिया गया है। इन मकानों को खाली करने के लिए पहले ही मुनादी (घोषणा) कराई गई थी। बुधवार दोपहर को नरेली बाजार तिराहे से बुलडोजर ने ध्वस्तीकरण की शुरुआत की।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ड्रोन से निगरानी
दालमंडी जैसे घनी आबादी वाले और संवेदनशील इलाके में किसी भी विरोध या अप्रिय घटना को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी:
भारी फोर्स तैनात: स्थानीय पुलिस के साथ RAF (Rapid Action Force) और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात रहे।
बैरिकेडिंग: नई सड़क से दालमंडी जाने वाले रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया ताकि कार्रवाई में बाधा न आए।
ड्रोन सर्विलांस: पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों के माध्यम से की गई।
- क्या है पूरा प्रोजेक्ट
- दूरी और चौड़ाई: लगभग 650 मीटर लंबी दालमंडी सड़क को करीब 17.5 मीटर तक चौड़ा किया जाना है।
- चिह्नित भवन: प्रोजेक्ट के दायरे में कुल 181 निजी भवन और 6 धार्मिक स्थल चिह्नित किए गए हैं।
उद्देश्य: गोदौलिया-लहुराबीर मार्ग से काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 तक श्रद्धालुओं और एंबुलेंस की पहुंच को आसान बनाना।
व्यापारियों की चिंता और विरोध
कार्रवाई के दौरान कई स्थानीय व्यापारियों ने अपनी रोजी-रोटी को लेकर चिंता व्यक्त की। व्यापारियों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पीढ़ियों पुराने व्यापार के उजड़ने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने भी ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के नुकसान का हवाला देते हुए इस कार्रवाई का विरोध किया है।
अधिकारी का कथन: PWD के अधिशासी अभियंता के.के. सिंह ने बताया कि केवल उन्हीं भवनों पर कार्रवाई की जा रही है जिनकी सहमति से रजिस्ट्री हो चुकी है। शेष भवनों के स्वामियों से भी संवाद कर कागजी कार्रवाई पूरी करने की अपील की गई है।