लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शुद्ध पेयजल एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के 75 जिलों में से 63 जिलों का भूजल फ्लोराइड (Fluoride) से प्रदूषित है। वहीं, 25 जिलों में आर्सेनिक (Arsenic) का खतरनाक स्तर पाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के 18 जिले ऐसे हैं जहां फ्लोराइड और आर्सेनिक दोनों का घातक संगम देखने को मिल रहा है।
इन जिलों में है सबसे ज्यादा खतरा
जांच में सामने आया है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे मैदानी इलाकों में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक है।
दोनों से प्रभावित (18 जिले): लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, अलीगढ़, बहराइच, बाराबंकी, गोंडा, जौनपुर, झांसी, लखीमपुर खीरी, मथुरा, मिर्जापुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर और गाजीपुर आदि।
आर्सेनिक के हॉटस्पॉट: बलिया (सबसे अधिक), गाजीपुर, लखीमपुर खीरी और गोरखपुर के तराई क्षेत्रों में आर्सेनिक का स्तर मानक से 20 गुना तक अधिक मिला है।
फ्लोराइड का कहर: आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, प्रतापगढ़ और सोनभद्र के कई गांवों में फ्लोराइड 3 PPM तक पाया गया है (जबकि मानक 1 PPM है)।
सेहत पर क्या होता है असर?
फ्लोराइड: इससे ‘फ्लोरोसिस’ की बीमारी होती है, जिसमें दांत पीले पड़ जाते हैं और हड्डियां कमजोर होकर मुड़ने लगती हैं।
आर्सेनिक: लंबे समय तक आर्सेनिक वाला पानी पीने से कैंसर (त्वचा, फेफड़े, मूत्राशय), चर्म रोग और नसों की बीमारियां हो सकती हैं।
सरकार का क्या है कदम?
जल जीवन मिशन के तहत प्रभावित क्षेत्रों में पाइप पेयजल योजनाएं शुरू की गई हैं। कई जगहों पर जल शोधन संयंत्र (Purification Plants) लगाए गए हैं और लोगों को लाल निशान वाले हैंडपंपों का पानी न पीने की सलाह दी गई है।
सतर्क रहें: यदि आपके क्षेत्र में पानी का स्वाद बदला हुआ है या दांतों में पीलापन बढ़ रहा है, तो तुरंत पानी की जांच कराएं और केवल सरकारी फिल्टर प्लांट या प्रमाणित जल स्रोतों का ही उपयोग करें।