यूपी : उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने लखनऊ जिले को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। राजधानी में कुल 30% मतदाताओं के नाम कटे हैं, यानी पहले 39.94 लाख मतदाता थे, अब ड्राफ्ट में सिर्फ 27.94 लाख बचे हैं—करीब 12 लाख नाम बाहर। यह शहरी इलाकों में प्रवासन, डुप्लीकेट एंट्री और फॉर्म न जमा होने का नतीजा है।
2022 विधानसभा चुनाव में लखनऊ की 9 सीटों में से BJP ने 7 और सपा ने 2 (लखनऊ कैंट और सरोजिनी नगर) जीती थीं। SIR का असर इन सभी सीटों पर पड़ा है, क्योंकि पूरा जिला एकसमान प्रभावित हुआ। शहरी सीटों जैसे लखनऊ कैंट (कैंटोनमेंट क्षेत्र), लखनऊ वेस्ट, सेंट्रल, ईस्ट और नॉर्थ में फॉर्म सबमिशन रेट कम (61-70%) रहा, जिससे नाम कटने की संख्या ज्यादा हुई। ग्रामीण-शहरी मिक्स्ड सीटों जैसे मलिहाबाद और मोहनलालगंज में सबमिशन बेहतर (83%) था, लेकिन कुल मिलाकर जिले का औसत 30% कटौती चौंकाने वाला है।
SIR का मुख्य असर:
- शहरी BJP गढ़ प्रभावित: लखनऊ BJP की मजबूत सीटों वाला जिला है। यहां नाम कटने से पार्टी को चिंता है, क्योंकि शहरी वोटर (मध्यम वर्ग, प्रोफेशनल्स) ज्यादा प्रभावित हुए जो अक्सर BJP सपोर्टर माने जाते हैं।
- सपा की सीटें भी नहीं बचीं: सपा की जीती सीटों पर भी यही औसत कटौती, क्योंकि जिला स्तर पर एकरूपता है।
- राजनीतिक हलचल: BJP इसे “घोस्ट वोटर्स” हटाने का सकारात्मक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष (सपा-कांग्रेस) शहरी इलाकों में सिलेक्टिव कटौती का आरोप लगा रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी है और मुख्य कारण माइग्रेशन व अनुपस्थिति हैं।
जिनके नाम कटे हैं, वे 6 फरवरी 2026 तक फॉर्म-6 भरकर दावा कर सकते हैं। अंतिम लिस्ट 6 मार्च को आएगी। मतदाता voters.eci.gov.in या CEO UP पोर्टल पर नाम चेक करें। यह बदलाव 2027 चुनाव पर असर डाल सकता है, खासकर शहरी सीटों पर जहां मार्जिन कम होते हैं।