यूपी SIR: वाराणसी में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 18% मतदाता बाहर, 5.73 लाख से ज्यादा नाम कटे

यूपी : उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुल मतदाताओं का 18.18 प्रतिशत यानी 5,73,203 से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं। राज्य स्तर पर कुल 2.89 करोड़ (18.7%) मतदाताओं के नाम कटे हैं, जबकि वाराणसी में यह आंकड़ा काफी चिंताजनक है।

मुख्य कारण क्या हैं?

चुनाव आयोग के अनुसार नाम हटाने के पीछे ये वजहें हैं:
मृतक मतदाता — राज्य में 46.23 लाख (2.99%) नाम।
स्थायी रूप से स्थानांतरित या अनुपस्थित — 2.17 करोड़ (14.06%)।
डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन — 25.47 लाख (1.65%)।

वाराणसी में सबसे ज्यादा प्रभाव कैंट और उत्तरी विधानसभा क्षेत्रों पर पड़ा है, जहां शहरी क्षेत्रों में प्रवास और फॉर्म न भरने के कारण बड़ी संख्या में नाम कटे।

क्या कह रहा है चुनाव आयोग?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि यह ड्राफ्ट अंतिम नहीं है। जिनके नाम कटे हैं, वे 6 फरवरी 2026 तक फॉर्म-6 भरकर दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। वैध मतदाताओं को फिर से जोड़ा जाएगा। अंतिम वोटर लिस्ट 6 मार्च 2026 को जारी होगी। मतदाता अपना नाम voters.eci.gov.in या ceo Uttar Pradesh पोर्टल पर चेक कर सकते हैं।

राजनीतिक प्रभाव और सवाल
वाराणसी में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से 2027 विधानसभा चुनाव पर असर की आशंका जताई जा रही है। विपक्षी दल इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी है और “घोस्ट वोटर्स” को हटाने का उद्देश्य है।
मतदाताओं से अपील है कि जल्द से जल्द अपना नाम चेक करें और जरूरत पड़ने पर दावा करें ताकि वोटिंग अधिकार प्रभावित न हो।