यूपी: मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में कोर्स कोऑर्डिनेटर भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, 69 में से 48 अयोग्य, 6.91 करोड़ की वसूली

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती में बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना में गरीब और मेधावी छात्रों को IAS, PCS, NEET, JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग दी जाती है। जांच में पता चला कि कुल 69 कोऑर्डिनेटरों में से केवल 21 पात्र निकले, जबकि 48 अयोग्य थे। इन अयोग्य लोगों को दो साल तक 60 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को 6.91 करोड़ रुपये की चपत लगी।

घोटाले की मुख्य बातें:

  • योग्यता नियम: कोर्स कोऑर्डिनेटर के पद के लिए यूपी PCS मुख्य परीक्षा (Mains) पास करना अनिवार्य था।
  • अनियमितता: आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों से अयोग्य लोगों की नियुक्ति की गई।
  • शिकायत और जांच: 29 अक्टूबर 2025 को शिकायत मिलने पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने जांच कराई।
  • कार्रवाई: आउटसोर्सिंग कंपनी अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्रा. लि. और संबंधितों पर गोमती नगर थाने में FIR दर्ज। 48 अयोग्य कोऑर्डिनेटरों से 6.91 करोड़ की वसूली होगी।
  • अधिकारियों पर भी गाज: दस्तावेज सत्यापन में लापरवाही करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की अलग प्रशासनिक जांच के आदेश।

विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने इसे गरीब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बताया और सरकार पर सिर्फ वसूली से मतलब रखने का आरोप लगाया। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है, लेकिन इस फर्जीवाड़े से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। जांच जारी है और आगे कार्रवाई रिपोर्ट पर होगी।