लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री योगी की 5 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में लंबी मुलाकात के बाद अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, खरमास खत्म होने के बाद यानी 14-15 जनवरी 2026 के आसपास कैबिनेट विस्तार हो सकता है। यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विस्तार की मुख्य वजहें:
- वर्तमान में कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 हो सकते हैं। करीब 6 पद खाली हैं।
- जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधना, खासकर पश्चिमी यूपी में जाट और अन्य पिछड़ा वर्ग को मजबूत करना।
- नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी (OBC-कुर्मी) की नियुक्ति के बाद संगठन और सरकार में तालमेल।
- कुछ पुराने मंत्रियों के विभाग बदलाव या बाहर का रास्ता भी संभव।
मंत्री बनने की रेस में प्रमुख नाम:
- भूपेंद्र चौधरी (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, जाट नेता) – पश्चिमी यूपी में प्रभाव, मंत्री पद लगभग तय माना जा रहा।
- आकाश सक्सेना (रामपुर विधायक) – मजबूत दावेदार।
- महेंद्र सिंह (एमएलसी) – चर्चा में।
- पूजा पाल – महिला चेहरा के रूप में संभावना।
- श्रीकांत शर्मा या सिद्धार्थ नाथ सिंह जैसे कुछ पुराने नामों की वापसी या नए चेहरे।
- पश्चिमी यूपी से 2-3, अवध और अन्य क्षेत्रों से संतुलन बनाने की कोशिश।
भाजपा का फोकस दलित, OBC और जाट समुदाय को साधने पर है, ताकि विपक्ष के PDA नैरेटिव का मुकाबला किया जा सके। दिल्ली में सीएम योगी की पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकातों में इन नामों पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।
यह विस्तार उत्तर प्रदेश को 2027 में फिर भाजपा की जीत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।