यूपी : उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महत्वपूर्ण मुलाकात की, जो दोपहर 12:30 बजे हुई। इसके बाद शाम को बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी बातचीत हुई। यह मुलाकातें ऐसे समय में हुई हैं जब यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव की चर्चाएं जोरों पर हैं।
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी और सीएम योगी के बीच करीब एक घंटे की बातचीत में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर फोकस रहा:
मंत्रिमंडल विस्तार: योगी कैबिनेट में कई पद खाली हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद और अनूप प्रधान जैसे मंत्रियों के केंद्र में जाने से और रिक्तियां बढ़ गईं। वर्तमान में 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 तक जगह है। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी (जाट समुदाय से) को कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की मजबूत संभावना है। पश्चिमी यूपी, अवध और अन्य क्षेत्रों से जातीय-क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए 5-6 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। कुछ पुराने मंत्रियों के विभाग बदलने या बाहर जाने की भी अटकलें हैं।
संगठन में फेरबदल: 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी संगठन को मजबूत करने पर जोर। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद जिला स्तर तक बदलाव की तैयारी। पंचायत चुनाव और मिशन-2027 की रणनीति पर भी मंथन हुआ।
विकास परियोजनाएं: जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी को आमंत्रित किया गया। निवेश और औद्योगिक विकास पर भी चर्चा, जहां हाल ही में बड़े उद्योगपतियों ने सीएम योगी से निवेश की बात की थी।
यह मुलाकात दिसंबर अंत में लखनऊ में हुई बीजेपी कोर कमिटी बैठक के बाद हुई है, जहां मंत्रिमंडल विस्तार पर नामों पर विचार किया गया था। खरमास खत्म होने के बाद (जनवरी मध्य से) विस्तार की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी का फोकस ओबीसी, दलित और पिछड़े वर्गों को साधने पर है, ताकि विपक्ष के PDA नैरेटिव को काउंटर किया जा सके।
राजनीतिक गलियारों में यह मुलाकात 2027 चुनाव की तैयारी का संकेत मानी जा रही है। योगी सरकार का यह कदम प्रदेश में नई ऊर्जा लाने वाला साबित हो सकता है। क्या जल्द ही नए मंत्रियों की शपथ होगी? सभी की नजरें लखनऊ और दिल्ली पर टिकी हैं।