कानपुर : मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से 15 से अधिक मौतें और सैकड़ों लोग बीमार पड़ने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश में भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कानपुर में जल निगम और नगर निगम की टीमें अलर्ट मोड में हैं। खासकर रामबाग, गोविंद नगर, जूही और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पेयजल के नमूने लिए जा रहे हैं ताकि किसी तरह का प्रदूषण समय रहते पकड़ा जा सके।
इंदौर के भागीरथपुरा में सीवेज लाइन लीकेज से पेयजल पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने की वजह से हुई त्रासदी ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यूपी में भी पुरानी पाइपलाइनों और लीकेज की समस्या आम है, इसलिए कानपुर जिलाधिकारी के निर्देश पर व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया है।
प्रशासन के प्रमुख कदम
- रामबाग और आसपास के इलाकों में घर-घर सर्वे, नलों से सैंपल कलेक्शन।
- जल निगम की लैब में तुरंत टेस्टिंग, बैक्टीरिया और केमिकल प्रदूषण की जांच।
- लोगों को सलाह: उबला पानी पीएं, टैंकर से सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था।
- पुरानी पाइपलाइनों का निरीक्षण और मरम्मत कार्य तेज।
- स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी सक्रिय, डायरिया जैसे लक्षणों पर निगरानी।
अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कानपुर में कोई बड़ा प्रदूषण नहीं मिला है, लेकिन सतर्कता के तौर पर यह कवायद जारी रहेगी। इंदौर जैसी घटना दोहराई न जाए, इसके लिए स्तर पर निर्देश जारी हो चुके हैं। लोग भी जागरूक हो रहे हैं और पानी की शिकायतें सीधे अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं। यह कदम जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और उम्मीद है कि समय रहते सभी जोखिम दूर हो जाएंगे।