नया संकट! 2026 में करीब 10 लाख भारतीयों का कनाडा में कानूनी दर्जा खतरे में, कई को लौटना पड़ सकता भारत है

नई दिल्ली : कनाडा में रह रहे लाखों भारतीयों के लिए बड़ा झटका। इमिग्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 के मध्य तक करीब 10 लाख भारतीय अस्थायी निवासी अपना कानूनी दर्जा खो सकते हैं। यह संख्या कुल अवैध अप्रवासियों का आधा हिस्सा हो सकती है, जो कनाडा में अब तक का सबसे बड़ा संकट पैदा कर सकती है। मुख्य वजह अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट की रिकॉर्ड संख्या में समाप्ति है।

क्या हैं आंकड़े? इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के डेटा के मुताबिक, 2025 के अंत तक करीब 10.53 लाख वर्क परमिट खत्म हो चुके हैं, जबकि 2026 में 9.27 लाख और समाप्त होंगे। इनमें से आधे से ज्यादा भारतीयों के हैं, क्योंकि कनाडा में अस्थायी श्रमिकों और छात्रों में भारतीय सबसे बड़ी संख्या में हैं। 2026 की पहली तिमाही में ही 3.15 लाख परमिट खत्म होने की उम्मीद है, जिससे सिस्टम पर भारी दबाव पड़ेगा।

सरकार की नई नीति: हाउसिंग क्राइसिस, स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ और बेरोजगारी के कारण कनाडा सरकार ने अस्थायी निवासियों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। 2026-2028 प्लान में नए स्टडी परमिट 49% तक घटाए जाएंगे (2026 में सिर्फ 1.55 लाख), जबकि टेम्परेरी वर्कर्स के लिए भी सख्ती बढ़ी है। परमानेंट रेजिडेंसी के रास्ते सीमित हो गए हैं। कई भारतीय छात्र और वर्कर्स परमानेंट रेजिडेंसी के लिए पॉइंट्स नहीं जुटा पा रहे।

प्रभावित कौन? ज्यादातर पंजाब, गुजरात और अन्य राज्यों से गए छात्र और वर्कर्स। कई ने महंगे कोर्स किए या कम सैलरी वाली नौकरियां कीं, उम्मीद थी पीआर मिल जाएगी। अब परमिट खत्म होने पर या तो वापस लौटना पड़ेगा या अवैध होकर रहना पड़ेगा। कुछ मामलों में डिपोर्टेशन का खतरा भी है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सिराह का कहना है कि कनाडा ने कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ स्टेटस खोते नहीं देखा। इससे सोशल टेंशन बढ़ सकता है। सरकार कुछ टेम्परेरी वर्कर्स को पीआर का रास्ता दे रही है, लेकिन यह सीमित है।

यह स्थिति कनाडा की तेज इमिग्रेशन नीति के साइड इफेक्ट्स को दिखाती है। भारतीयों को सलाह है कि जल्द से जल्द विकल्प तलाशें – या तो एक्सटेंशन लें या वापसी की तैयारी करें।