राज्यसभा चुनाव 2026: BSP का सूपड़ा साफ, विपक्ष की ताकत आधी, 6 केंद्रीय मंत्रियों सहित 71 सांसदों का भविष्य दांव पर

नई दिल्ली: साल 2026 भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के लिए बड़ा बदलाव लाने वाला है। इस साल अप्रैल, जून और नवंबर में चरणबद्ध तरीके से कुल 71 सीटों पर चुनाव होंगे, जिन पर कई दिग्गज नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है। इनमें मोदी सरकार के 6 केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। वर्तमान विधानसभा गणित के अनुसार, सत्तारूढ़ NDA की ताकत राज्यसभा में और मजबूत होने की संभावना है, जबकि विपक्ष की सीटें घट सकती हैं। खास तौर पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) का राज्यसभा से पूरी तरह सफाया हो सकता है।

इन 71 सीटों में सबसे ज्यादा 30 सीटें भाजपा की हैं। वर्तमान में राज्यसभा में भाजपा के पास ऐतिहासिक उच्चतम 103 सीटें हैं, जबकि NDA की कुल ताकत 129 के करीब है। विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास महज 78 सीटें हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के चुनाव के बाद NDA की सीटें 145 तक पहुंच सकती हैं, जबकि विपक्ष की संख्या और कम हो जाएगी।

दांव पर लगे प्रमुख नाम:

केंद्रीय मंत्री: हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम), बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू, जॉर्ज कुरियन, रामनाथ ठाकुर और रामदास अठावले।
विपक्ष के दिग्गज: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (कर्नाटक), शरद पवार (महाराष्ट्र), दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश), पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा (कर्नाटक)।
अन्य: जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह (उप सभापति), आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता आदि।

BSP के लिए बड़ा झटका: उत्तर प्रदेश की 10 सीटों में से एक पर फिलहाल BSP का कब्जा है, लेकिन मौजूदा विधानसभा में पार्टी की कमजोर स्थिति को देखते हुए मायावती की पार्टी राज्यसभा से बाहर हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो 36 साल बाद संसद में BSP की आवाज पूरी तरह गायब हो जाएगी।

राज्यवार नजर:

  • उत्तर प्रदेश (10 सीटें): भाजपा 8, SP और BSP 1-1। चुनाव बाद भाजपा और मजबूत।
  • महाराष्ट्र (7 सीटें): महायुति को फायदा, शरद पवार की वापसी मुश्किल।
  • बिहार (5 सीटें): NDA को 4, विपक्ष को 1।
  • कर्नाटक (4 सीटें): कांग्रेस को 3 का अनुमान।
  • अन्य राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम आदि से भी सीटें खाली।

यह चुनाव इसलिए भी अहम हैं क्योंकि 2026 में ही असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं, जो राज्यसभा के गणित को और प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि राज्यसभा में बहुमत मजबूत होने से केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयक पास कराना आसान हो जाएगा। आने वाले महीनों में पार्टियां अपनी रणनीति तेज करेंगी और क्रॉस वोटिंग या गठबंधन की संभावनाएं भी चर्चा में रहेंगी। यह साल भारतीय राजनीति के पावर बैलेंस को नई दिशा दे सकता है।