लखनऊ: KGMU डॉक्टर पर धर्मांतरण का आरोप, फरार हुआ रमीज मलिक, कुर्की के आदेश

अब धर्मांतरण का दर्टी खेल यहां तक बढ़ गया है कि पढ़े-लिखे डॉक्टर भी ये काम करने में जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सनसनीखेज धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में पुलिस ने कानूनी शिकंजा कस दिया है। आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक उर्फ रमीज उद्दीन नायक के खिलाफ जिला अदालत ने गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। आरोपी अभी भी फरार है और पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही उसकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी हो सकती है।

मामला क्या है?

KGMU के पैथोलॉजी विभाग में कार्यरत एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने आरोपी रमीज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि रमीज ने शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया, निजी फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल किया और इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाया। जब पीड़िता ने धर्मांतरण से इनकार किया तो आरोपी ने संबंध तोड़ दिए, जिससे आहत होकर महिला डॉक्टर ने आत्महत्या का प्रयास भी किया।

पीड़िता के परिजनों ने खुलासा किया कि रमीज पहले से शादीशुदा है और फरवरी 2025 में एक अन्य हिंदू महिला का धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह कर चुका है। यह बात पीड़िता से छिपाई गई थी। मामले में उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम सहित यौन शोषण, धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

चौक थाना पुलिस ने दिसंबर 2025 में FIR दर्ज की थी। KGMU प्रशासन ने आरोपी को तत्काल निलंबित कर कैम्पस में प्रवेश पर रोक लगा दी। पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर आपबीती सुनाई, जिसके बाद CM ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस की तीन टीमें उत्तराखंड (आरोपी का पैतृक घर खटीमा) सहित कई राज्यों में दबिश दे रही हैं, लेकिन आरोपी का पता नहीं चल सका है।

डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट ने पुलिस के आवेदन पर NBW जारी किया है। आरोपी की गिरफ्तारी तक छापेमारी जारी रहेगी। विशाखा कमेटी की जांच भी चल रही है, जिसमें महिला सदस्यों को शामिल किया गया है।

सामाजिक प्रतिक्रिया

मामले ने लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है। डॉक्टरों और नागरिकों ने लखनऊ में कैंडल मार्च निकालकर आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। राजनीतिक दलों ने भी इसे गंभीरता से लिया है, जबकि कुछ संगठनों ने KGMU प्रशासन पर निष्पक्ष जांच का दबाव बनाया है।

पुलिस का कहना है कि आरोपी जल्द गिरफ्त में होगा। यह मामला मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा और नैतिकता के सवाल उठा रहा है। जांच पूरी होने पर और खुलासे हो सकते हैं कि क्या यह कोई संगठित गिरोह का हिस्सा है।