BMC Election 2026: ठाकरे भाइयों का गठबंधन और परिवारवाद का बोलबाला, मुकाबला रोचक

एशिया की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव अब पूरी तरह से रंगारंग मोड में आ चुके हैं। 15 जनवरी को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दलों के गठबंधन और सीट बंटवारे ने मुंबई की सियासत को नई करवट दे दी है। 227 वार्डों वाली इस निगम पर कब्जे की जंग में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी गठबंधनों के बीच है, लेकिन ठाकरे भाइयों का एकजुट होना सबसे बड़ी सुर्खी बना हुआ है।

महायुति का मजबूत गठबंधन
भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सीट शेयरिंग फाइनल कर ली है। भाजपा 137 सीटों पर जबकि शिंदे गुट 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। दोनों दल अपने कोटे से छोटे सहयोगियों को सीटें देंगे। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद महायुति का दावा है कि वह स्पष्ट बहुमत के साथ मेयर पद हासिल करेगी। अजित पवार की एनसीपी इस बार मुंबई में महायुति से अलग अकेले 94 सीटों पर मैदान में है।

ठाकरे भाइयों की जोरदार वापसी
20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आएंगे। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठबंधन मराठी अस्मिता को केंद्र में रखकर महायुति को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। आज से दोनों भाइयों की संयुक्त रैलियां शुरू हो रही हैं, जबकि 4 जनवरी को संयुक्त घोषणापत्र जारी किया जाएगा। कुछ सूत्रों के मुताबिक शरद पवार की एनसीपी (एसपी) भी इस गठबंधन में शामिल हो सकती है।

कांग्रेस का अलग रास्ता
महाविकास अघाड़ी में दरार साफ दिख रही है। कांग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) से गठबंधन किया है, जिसमें वीबीए 62 सीटों पर लड़ेगी। कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी कर दी हैं, लेकिन उद्धव गुट के साथ सीधा गठबंधन नहीं हुआ। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अंतिम समय में लिया गया, जिससे मुंबई इकाई में असंतोष है।

परिवारवाद का दौर
इस चुनाव में परिवारवाद खुलकर सामने आया है। कम से कम 43 नेता अपने रिश्तेदारों को टिकट दिलाने में कामयाब हुए हैं। भाजपा से लेकर शिवसेना और अन्य दलों तक, बेटे-बेटियां, पत्नियां और भाई मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे लोकतंत्र में वंशवाद की बढ़ती प्रवृत्ति बता रहे हैं।

मतदान 15 जनवरी को एक चरण में होगा और नतीजे 16 जनवरी को आएंगे। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख आज है, जिसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची साफ हो जाएगी। मुंबई की सड़कें पोस्टरों से पट चुकी हैं और रैलियों का दौर शुरू हो गया है। देखना यह है कि मराठी मानूस का वोट किस करवट बैठता है और 74 हजार करोड़ के बजट वाली इस निगम की कमान किसके हाथ लगती है।