कानूनी आपातकाल में आधी रात को भी खुलेगी अदालत: लीगल इमरजेंसी’ पर CJI सूर्यकांत का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने संवैधानिक अदालतों को वास्तव में “जनता की अदालत” बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने घोषणा की कि कानूनी इमरजेंसी (लीगल इमरजेंसी) में नागरिक अब कार्य समय के बाद भी – यहां तक कि आधी रात को – सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकेंगे।

CJI सूर्यकांत ने कहा: “मेरा प्रयास है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को ऐसी जनता की अदालतें बनाया जाए, जहां लीगल इमरजेंसी में किसी भी समय (कार्य समय के बाहर भी) संपर्क किया जा सके।”

उदाहरण: अगर जांच एजेंसियां देर रात गिरफ्तारी की धमकी दें या मौलिक अधिकारों का हनन हो, तो व्यक्ति तुरंत संरक्षण के लिए अदालत पहुंच सकेगा।

तुलना: संवैधानिक अदालतें अस्पतालों की तरह काम करेंगी, जहां इमरजेंसी वार्ड हमेशा खुले रहते हैं।

साथ ही: महत्वपूर्ण मामलों में वकीलों की बहस के लिए सख्त समयसीमा लागू। अब लंबी-लंबी दलीलें नहीं चलेंगी, ताकि गरीब मुवक्किलों को भी बराबर मौका मिले।

पृष्ठभूमि: जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को 53वें CJI बने। उनका फोकस न्याय में देरी कम करना और आम नागरिकों तक पहुंच बढ़ाना है।

यह घोषणा मौलिक अधिकारों की त्वरित सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाएगी। अभी यह प्रयास और दृष्टिकोण है – कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो रही है।