लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच मंगलवार शाम को राजधानी लखनऊ में एक बड़ी घटना हुई, जब भाजपा सहित विभिन्न दलों के करीब 45-50 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के आवास पर जुटे। इस बैठक को आयोजकों ने ‘सहभोज’ और सामाजिक मिलन बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक शाम 7 बजे शुरू हुई और आधी रात तक चली। इसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के अधिकांश ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। मौजूद नेताओं में सीएम योगी के करीबी शलभमणि त्रिपाठी, मिर्जापुर के रत्नाकर मिश्र, एमएलसी उमेश द्विवेदी जैसे दिग्गज नाम थे। बैठक में लिट्टी-चोखा और फलाहार परोसा गया, लेकिन चर्चा के मुद्दे गंभीर थे।
इसमें ब्राह्मण समाज की एकता, आर्थिक रूप से पिछड़े ब्राह्मणों के लिए फंड, समाज में संस्कारों की कमी और बुजुर्गों की देखभाल जैसे सामाजिक विषय।
भाजपा नेताओं ने इसे अनौपचारिक और गैर-राजनीतिक बताया। विधायक रत्नाकर मिश्र ने कहा, “हमारी तीन पीढ़ियां एक छत के नीचे रहती थीं, अब एक पीढ़ी भी नहीं रह पाती। पश्चिमी संस्कृति की ओर झुकाव चिंता का विषय है। ब्राह्मण तो संस्कार देते हैं, इसमें गलत क्या है?” आयोजक पीएन पाठक ने भी जोर दिया कि यह सिर्फ सहभोज था, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं।
लेकिन विपक्ष ने इसे भाजपा में ब्राह्मणों के असंतोष का संकेत बताया। समाजवादी पार्टी के शिवपाल यादव ने कहा कि ब्राह्मण नेता अपमानित महसूस कर रहे हैं और सपा में सम्मान मिलेगा। कांग्रेस नेता अजय राय ने इसे ब्राह्मणों के हाशिए पर धकेले जाने का प्रमाण बताया।
यह बैठक कोई इत्तेफाक नहीं मानी जा रही। इससे पहले मानसून सत्र में ठाकुर विधायकों ने ‘कुटुंब परिवार’ के नाम पर बड़ा जुटान किया था, जिसमें करीब 40 ठाकुर विधायक शामिल हुए। उसके बाद कुर्मी और लोध समाज के विधायकों की भी ऐसी बैठकें हुईं। जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय गोलबंदी तेज हो रही है। ब्राह्मण समाज में यह भावना है कि अन्य जातियां शक्ति प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन ब्राह्मण पिछड़ रहे हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक होने के बावजूद समाज को पर्याप्त ताकत नहीं मिलने की शिकायतें हैं।
योगी सरकार में हलचल भी मची है। बैठक की खबर के बाद सीएम के OSD ने कुछ विधायकों से संपर्क किया। कैबिनेट विस्तार और पार्टी संगठन में बदलाव की अटकलों के बीच यह जुटान भाजपा आलाकमान के लिए भी टेंशन का सबब बन गई है।
क्या यह सिर्फ सामाजिक मिलन है या योगी सरकार में ब्राह्मण नाराजगी की बड़ी वजह? आने वाले दिन बताएंगे, लेकिन यूपी की सियासत में जातीय समीकरण एक बार फिर गरमा गए हैं।