यूपी में ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर हलचल: सपा के बागी विधायक का तंज, अखिलेश के समय तो ऐसी बैठकें नहीं होती थीं

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की बंद कमरे में हुई बैठक ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। कुशीनगर के भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ आवास पर हुई इस बैठक में करीब 40-50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। बैठक को ‘सहभोज’ का नाम दिया गया, लेकिन विपक्ष इसे भाजपा में आंतरिक असंतोष का संकेत बता रहा है।

इस बैठक पर समाजवादी पार्टी के एक बागी विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब ऐसी जातीय आधार पर विधायकों की अलग-अलग बैठकें नहीं होती थीं। सब एकजुट होकर काम करते थे। अब भाजपा में ठाकुरों के बाद ब्राह्मणों की बैठक से साफ है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। बागी विधायक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “योगी सरकार में जातीय समीकरण बिगड़ रहे हैं, इसलिए विधायक अलग-अलग गुट बना रहे हैं।”

बैठक में क्या हुआ?
सूत्रों के अनुसार, बैठक में ब्राह्मण समुदाय की एकजुटता, सामाजिक मुद्दों और बुजुर्गों की देखभाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई। आयोजक पीएन पाठक ने स्पष्ट किया कि यह बैठक पूरी तरह सामाजिक थी और इसमें किसी अन्य पार्टी के विधायक शामिल नहीं थे। विधायक रत्नाकर मिश्र ने कहा कि समुदाय में फैल रही विखंडन की समस्या पर बात हुई, जैसे बच्चे पश्चिमी संस्कृति की ओर जा रहे हैं और बुजुर्गों को सम्मान नहीं मिल रहा। उन्होंने इसे राजनीतिक न बताते हुए अन्य समुदायों की ऐसी बैठकों का उदाहरण दिया।

विपक्ष का हमला
समाजवादी पार्टी ने इसे भाजपा की आंतरिक कलह बताया। पार्टी के एक नेता ने कहा कि ठाकुर विधायकों की ‘कुटुंब’ बैठक के बाद अब ब्राह्मणों की बैठक से साफ है कि सरकार से असंतोष बढ़ रहा है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विधायकों की मौजूदगी से 2027 के चुनाव में प्रभाव पड़ सकता है।

भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ सामाजिक आयोजन था और सरकार मजबूत स्थिति में है। कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विधानसभा सत्र के दौरान ऐसी बैठकों से जातीय आधार पर ध्रुवीकरण की कोशिश दिख रही है, जो आने वाले समय में सियासी समीकरण बदल सकती है।