लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ आ गया है। भाजपा के करीब 40-50 ब्राह्मण विधायकों की लखनऊ में हुई बंद कमरे की बैठक ने हलचल मचा दी है। इस बैठक को पार्टी में बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने इस मौके को भुनाने की पूरी तैयारी कर ली है। सपा के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने खुलकर भाजपा के इन विधायकों को न्योता दे दिया है।
शिवपाल यादव ने कहा, “भाजपा में ब्राह्मण विधायकों को सम्मान नहीं मिल रहा, इसलिए वे बैठक कर रहे हैं। अगर उन्हें लगता है कि पार्टी में उनकी सुनवाई नहीं हो रही, तो वे समाजवादी पार्टी के साथ आ जाएं। यहां सभी को पूरा सम्मान और जगह मिलेगी।” शिवपाल ने यह बयान एक इंटरव्यू में दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
बैठक की वजह क्या?
- सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के ब्राह्मण विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं।
- टिकट वितरण, पदों की नियुक्ति और संगठन में उपेक्षा जैसे मुद्दे मुख्य हैं।
- विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान यह बैठक कुशीनगर विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर हुई।
- कुछ विधायकों ने इसे सामान्य मिलन बताया, लेकिन विपक्ष इसे भाजपा की अंदरूनी कलह का सबूत बता रहा है।
सपा की रणनीति
समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ब्राह्मण वोट बैंक को साधने में जुटी है। शिवपाल यादव का यह बयान पार्टी की उस योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें नाराज ब्राह्मण नेताओं को सपा में शामिल कर भाजपा को कमजोर किया जाए। पहले भी सपा ने ब्राह्मण सम्मेलन और अन्य कार्यक्रमों से इस समुदाय को जोड़ने की कोशिश की है।
भाजपा का जवाब
भाजपा नेताओं ने बैठक को सामान्य बताया और कहा कि पार्टी में सब एकजुट हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह सिर्फ साथियों का मिलना-जुलना था। विपक्ष बेवजह हवा बना रहा है।” हालांकि, अंदरखाने पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर नजर रखे हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा के ब्राह्मण विधायक सच में नाराज हैं, तो यह सपा के लिए बड़ा मौका हो सकता है। आने वाले दिनों में इस पर और खुलासे होने की संभावना है।