रामपुर प्रशासन का अमर उजाला पर सनसनीखेज आरोप: ब्लैकमेलिंग के इरादे से फर्जी खबर चलाई गई!

यूपी : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के प्रशासन ने स्थानीय दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशासन का कहना है कि 21 दिसंबर 2025 को प्रकाशित एक समाचार “रामपुर–उत्तराखण्ड सीमा पर अवैध खनन क्षेत्र में जाने की इजाजत नहीं, कोसी के तट पर माफिया कर्फ्यू” पूरी तरह तथ्यहीन, भ्रामक और अतिरंजित है।

जिलाधिकारी कार्यालय से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि कोसी नदी के तट पर किसी तरह का खनन माफिया का आतंक या “कर्फ्यू” जैसी स्थिति नहीं है। क्षेत्र में विधि-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है, किसान नियमित कृषि कार्य कर रहे हैं और आम लोगों की आवाजाही सुरक्षित है।

प्रशासन ने इसे जिला प्रशासन की छवि को जानबूझकर खराब करने का प्रयास बताया है। संबंधित अधिकारियों (एसडीएम स्वार, सीओ स्वार आदि) से ली गई रिपोर्ट में भी ऐसे किसी दबाव या अवैध गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई। इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से जनता में भय और भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए अमर उजाला के संपादक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है।

यह मामला दिसंबर 2025 का है और सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया। अमर उजाला ने 20 दिसंबर को रामपुर में अवैध खनन पर एक विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कोसी नदी क्षेत्र में माफिया-अफसर गठजोड़ के आरोप लगाए गए थे। प्रशासन का कहना है कि इसी रिपोर्ट से जुड़े कुछ विजुअल्स गलत स्थान के हैं।

अजय कुमार द्विवेदी (डीएम, रामपुर)

प्रशासन ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की है और मामले की गहन जांच की मांग उठ रही है। यदि मीडिया संस्थान जानबूझकर गलत जानकारी फैलाते हैं, तो यह प्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है, जहां कुछ लोग प्रशासन के पक्ष में हैं तो कुछ अवैध खनन की शिकायतें उठा रहे हैं। आगे की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

यह जानकारी उपलब्ध आधिकारिक बयानों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। दोनों पक्षों के दावों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया गया है।)

शशांक मिश्रा,संपादक बरेली (अमर उजाला)