लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सोमवार को विपक्षी दलों के बीच हंगामा चरम पर पहुंच गया। समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। वॉकआउट का कारण सरकार के जवाबों में कथित पक्षपात और कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, कोडीन सिरप घोटाले तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर असंतोष बताया जा रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि योगी सरकार जनता के सवालों का सामना करने के बजाय बहस छेड़ रही है।
विपक्ष के वॉकआउट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में अपनी चिरपरिचित तीखी शैली में हमला बोला। उन्होंने विपक्ष, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा, “देश के अंदर दो नमूने घूम रहे हैं। एक तो राहुल गांधी जैसे लोग, जो बाहर जाकर भारत की बदनामी कराते हैं और अयोध्या विवाद को जानबूझकर जिंदा रखने की कोशिश करते हैं।
दूसरा नमूना तो वही पुराना, जो देश को तोड़ने की साजिश रचता रहता है।” योगी ने इसे ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बजाय ‘भारत तोड़ो अभियान’ करार दिया और कहा कि ऐसे तत्वों से बीजेपी को चुनावी रास्ता साफ मिलता रहता है।
यह बयान वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा के दौरान आया, जहां विपक्ष ने राष्ट्रगीत के गायन पर भी आपत्ति जताई थी। योगी ने इसे जिन्ना जैसी मानसिकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि नए जिन्नाओं को जन्म देने की साजिश रुकनी चाहिए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तुरंत पलटवार किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सरकार पुरानी स्क्रिप्ट दोहरा रही है, नई बातें लाए। उन्होंने वॉकआउट को जनता का आक्रोश बताया।
सत्र में आज अनुपूरक बजट भी पेश किया गया, लेकिन हंगामे के कारण चर्चा प्रभावित रही। स्पीकर सत्यदेव पचौरी ने सदन को स्थगित करते हुए सभी दलों से शांति की अपील की। विपक्ष का दावा है कि यह वॉकआउट सरकार की नाकामी को उजागर करने का प्रयास है, जबकि बीजेपी इसे विपक्ष की हताशा का परिचायक बता रही है। सत्र 24 दिसंबर तक चलेगा, जहां और तनाव की आशंका है।