कोलकाता: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को एक कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत मूल रूप से एक हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने इसे एक अटल सत्य बताया और जोर देकर कहा कि इसकी पुष्टि के लिए संविधान या संसद से किसी प्रकार की औपचारिक स्वीकृति की जरूरत नहीं है।
भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा, “सूर्य पूर्व दिशा से उगता है, क्या इसके लिए भी संविधान में लिखवाने की जरूरत है? ठीक वैसे ही भारत की पहचान हिंदू राष्ट्र के रूप में हजारों वर्षों से चली आ रही है। यह सच्चाई है, जो कभी बदलेगी नहीं।” उन्होंने आगे बताया कि संविधान की प्रस्तावना में ही हिंदुत्व की झलक मौजूद है, जहां सभी उपासना पद्धतियों को स्वतंत्रता दी गई है।
आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ से जुड़े व्याख्यानमाला में भागवत ने हिंदू समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने जाति व्यवस्था को हिंदुत्व का आधार नहीं माना और मुस्लिम समुदाय से राष्ट्रीय एकता में योगदान देने का आग्रह किया। साथ ही, बंगाल में हिंदुओं की एकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि हिंदू संगठित हो जाएं तो राज्य के हालात जल्द बदल सकते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में हिंदुत्व और राष्ट्रीयता पर बहस जोरों पर है। भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी धर्म विशेष पर आधारित शासन नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाली व्यवस्था है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा ऐलान: भारत स्वाभाविक रूप से हिंदू राष्ट्र, संवैधानिक बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं
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