पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अब रिवाइवल मोड में आ गई है। पार्टी हाईकमान के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का बड़ा अभियान चला रही है। दिग्गज नेता विभिन्न जिलों में डेरा डालकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे, बूथ स्तर तक कमेटियां गठित करेंगे और कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करेंगे।
अभियान की मुख्य रणनीति
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने हालिया बैठक में साफ कहा कि हार के कारणों की गहन समीक्षा के बाद अब फोकस संगठन विस्तार पर है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व मंत्री अलग-अलग जिलों में लंबे समय तक रुककर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करेंगे। इनमें ब्लॉक और बूथ स्तर की कमेटियों का पुनर्गठन, नए सदस्यों की भर्ती और युवा-महिला कार्यकर्ताओं को प्रमुख जिम्मेदारी देना शामिल है। विशेष रूप से उन जिलों पर जोर जहां कांग्रेस का वोट शेयर कमजोर रहा।
हाईकमान का सीधा दखल
कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार इकाई को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संगठन को स्वतंत्र और मजबूत बनाया जाए। कुछ नेता दिल्ली में हाईकमान से मुलाकात के लिए रुके हुए हैं, जहां भविष्य की रणनीति पर चर्चा हो रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की यात्राओं से मिली ऊर्जा को अब जमीनी स्तर पर बदला जाएगा। दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोट बैंक को फिर से जोड़ने पर विशेष फोकस रहेगा।
कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद
प्रदेश भर के कार्यकर्ता इस अभियान से उत्साहित हैं। कई जिलों में पहले से ही बैठकें शुरू हो गई हैं, जहां पुराने नेताओं के साथ युवा चेहरे को आगे लाने की बात हो रही है। पार्टी का मानना है कि मजबूत संगठन से ही भविष्य के लोकसभा और स्थानीय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन संभव है।
यह अभियान बिहार कांग्रेस के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में जिलों से नेता रिपोर्ट submit करेंगे, जिसके आधार पर बड़े फैसले लिए जाएंगे। पार्टी अब गठबंधन पर निर्भरता कम कर खुद की ताकत बढ़ाने पर जोर दे रही है।
बिहार कांग्रेस में नई उर्जा: दिग्गज नेता जिलों में उतरेंगे, जमीनी स्तर पर संगठन को मिलेगी मजबूती
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