प्रयागराज : महाकुंभ 2025 की समाप्ति के बाद भी प्रयागराज में धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की आवाजें बुलंद हो रही हैं। हाल ही में माघ मेले की तैयारियों के दौरान साधु-संतों ने उत्तर प्रदेश सरकार से बड़ी मांग की है कि पूरे प्रयागराज को तीर्थ क्षेत्र घोषित किया जाए और शहर में मांस व शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए।
संतों की मुख्य मांगें
संत समाज का कहना है कि प्रयागराज संगम तट का पवित्र शहर है, जहां करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। ऐसे में मांसाहार और मदिरा की बिक्री शहर की पवित्रता को ठेस पहुंचाती है। एक प्रमुख संत ने कहा, “नॉन-वेज और शराब की दुकानों को लाइसेंस नहीं मिलना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता पाया गया तो उसे कड़ी सजा दी जानी चाहिए।” संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि शहर को पूर्ण रूप से शाकाहारी और मदिरा-मुक्त क्षेत्र बनाया जाए।
महाकुंभ का बैकग्राउंड
महाकुंभ 2025 में पहले से ही प्रयागराज में मांस और शराब की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगा था, जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चला। इस दौरान मेला क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सख्ती से नियम लागू किए गए थे। अब संत चाहते हैं कि यह प्रतिबंध स्थायी हो जाए, ताकि प्रयागराज हमेशा तीर्थ स्थल की गरिमा बनाए रखे।
प्रशासन की स्थिति
प्रशासन का कहना है कि महाकुंभ के दौरान लागू नियमों से शहर की छवि विश्व स्तर पर निखरी है। संतों की मांग पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार लेगी। इससे पहले भी अखाड़ा परिषद और अन्य धार्मिक संगठनों ने ऐसी अपीलें की हैं।
यह मांग प्रयागराज को धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। संतों का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं को भी शुद्ध वातावरण मिलेगा। मामले पर सरकार की ओर से जल्द कोई घोषणा होने की उम्मीद है।
प्रयागराज को तीर्थ स्थल घोषित करो: संतों ने पूरे शहर में मांस-मदिरा पर स्थायी प्रतिबंध की उठाई मांग
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