बंगाल में ‘एकला चलो’ की राह पर कांग्रेस, वाममोर्चा के साथ गठबंधन के लिए 50-50 के फार्मूले की रखी शर्त

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन में दरार साफ दिखने लगी है। प्रदेश कांग्रेस ने वाममोर्चा के साथ सीट समझौते के लिए 50-50 फॉर्मूले की सख्त शर्त रख दी है, जिसके बाद गठबंधन की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। अगर यह शर्त नहीं मानी गई तो कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने की राह पर चलने को तैयार है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वाममोर्चा के साथ गठबंधन तभी संभव है जब दोनों ब्लॉक्स को बराबर-बराबर सीटें मिलें। बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं, ऐसे में 50-50 फॉर्मूला लागू होने पर दोनों को करीब 147 सीटें मिलेंगी। अधीर ने कहा कि कांग्रेस की ताकत को कम आंकना गलती होगी और पार्टी अकेले लड़कर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि टीएमसी की नीतियां बीजेपी को फायदा पहुंचा रही हैं, लेकिन गठबंधन में कांग्रेस को कमजोर भूमिका स्वीकार नहीं होगी।

वाममोर्चा की ओर से अभी इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सीपीएम और अन्य वाम दल इतनी बड़ी संख्या में सीटें छोड़ने को तैयार नहीं हैं। पहले वाममोर्चा कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने का मन बना चुका था, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया था। अब यह नया प्रस्ताव गठबंधन को और जटिल बना रहा है।

इस बीच, कांग्रेस के कुछ नेता अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि 2016 और 2021 के गठबंधन में कांग्रेस को नुकसान हुआ था और इस बार ‘एकला चलो’ की नीति से पार्टी अपनी पुरानी जमीन वापस पा सकती है। वहीं, इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट रहने की अपील के बावजूद बंगाल में स्थानीय समीकरण अलग हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने इस विवाद पर चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष की एकता पहले ही टूट चुकी है और टीएमसी अकेले ही बीजेपी को हराने की स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कांग्रेस और वाम अलग-अलग लड़े तो त्रिकोणीय मुकाबला होगा, जिससे सत्तारूढ़ टीएमसी को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।