बांग्लादेश हिंसा : शरीफ उस्मान हादी की मौत से भड़की आग, शेख मुजीबुर रहमान के घर में फिर तोड़फोड़, 25 पत्रकारों को बचाया गया

ढाका : बांग्लादेश में जुलाई क्रांति के प्रमुख नेता और इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत की खबर आते ही देश भर में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। हादी पर पिछले हफ्ते ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान गोली चलाई गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी मौत की पुष्टि होते ही हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और कई शहरों में तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुईं।

प्रदर्शनकारियों ने ढाका के करवान बाजार इलाके में प्रमुख अखबारों प्रथम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों पर हमला बोल दिया। दोनों इमारतों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने इन मीडिया हाउसों पर भारत समर्थक होने का आरोप लगाया, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं। डेली स्टार की इमारत में धुएं से फंसे कम से कम 25 पत्रकारों को सेना और दमकल कर्मियों ने चार घंटे से ज्यादा की मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। प्रथम आलो के दफ्तर में भी व्यापक नुकसान हुआ।

हिंसा की लपेट में बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान का धानमंडी-32 स्थित ऐतिहासिक घर भी आ गया। प्रदर्शनकारियों ने यहां फिर से तोड़फोड़ की और आग लगा दी। इससे पहले भी यह घर कई बार निशाना बन चुका है। राजशाही में आवामी लीग के दफ्तर को बुलडोजर से गिरा दिया गया और कई जगहों पर पूर्व नेताओं के घरों को नुकसान पहुंचाया गया। चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के बाहर पत्थरबाजी हुई और भारत विरोधी नारे लगाए गए।

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें “लोकतंत्र का निडर योद्धा” बताया। उन्होंने शनिवार, 20 दिसंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है, जिसमें पूरे देश में झंडा आधा झुका रहेगा और विशेष प्रार्थनाएं होंगी। यूनुस ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की और हादी के हत्यारों को जल्द सजा देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि हिंसा से लोकतंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

हादी जुलाई 2024 की क्रांति में प्रमुख भूमिका निभाने वाले युवा नेता थे, जो शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों का चेहरा बने थे। वे फरवरी 2026 के चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरने वाले थे। उनकी मौत से पहले ही राजनीतिक तनाव चरम पर था। इंकिलाब मंच ने भी हिंसा से दूर रहने की अपील की है, लेकिन प्रदर्शन सड़कों पर जारी हैं।