लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विकास परियोजनाओं और निर्माण कार्यों में हो रही देरी को लेकर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि समयसीमा का पालन न करने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें ब्लैकलिस्टिंग और जुर्माने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य की दिशा में सभी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करना जरूरी है। सड़क, पुल, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि हर विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव अपनी परियोजनाओं की पाक्षिक समीक्षा करें, जबकि जिलाधिकारी साप्ताहिक स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करें। देरी के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाएगी।
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भी समीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के आदेश आए हैं, जिसमें मासिक, पाक्षिक और साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य की गई है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता और समयबद्धता से कोई समझौता नहीं होगा। यदि किसी प्रोजेक्ट में देरी हुई तो ठेकेदारों पर पेनल्टी लगाई जाएगी और बार-बार लापरवाही करने वाली कंपनियों को भविष्य के टेंडरों से बाहर किया जाएगा।
इससे पहले भी कई मामलों में देरी पर कार्रवाई हुई है, जैसे सड़क निर्माण में खराब गुणवत्ता पर इंजीनियरों का निलंबन और विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट्स में जुर्माना। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि बजट की कोई कमी नहीं है, लेकिन फंड का सही उपयोग और तेज कार्यान्वयन सुनिश्चित करें।
प्रदेश सरकार का जोर है कि 2047 तक विकसित भारत के विजन में यूपी की परियोजनाएं समय पर पूरी हों, ताकि जनता को सीधा लाभ मिले। अधिकारियों में इस निर्देश से हड़कंप मचा हुआ है और अब सभी स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
यूपी में निर्माण परियोजनाओं की देरी पर मुख्य सचिव सख्त, लापरवाह एजेंसियों पर कार्रवाई के निर्देश
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